संधारित्र (Capacitor) क्या है?

संधारित्र, जिसे कैपेसिटर भी कहा जाता है, एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है जो विद्युत ऊर्जा को संग्रहित करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह दो धातु प्लेटों से बना होता है जो एक विद्युतरोधी पदार्थ द्वारा अलग किए जाते हैं। जब इन प्लेटों को एक बैटरी से जोड़ा जाता है, तो एक प्लेट पर धनात्मक आवेश और दूसरी प्लेट पर ऋणात्मक आवेश जमा हो जाता है। प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र में ऊर्जा संग्रहित होती है।

संधारित्रों के श्रेणीक्रम संयोजन (Series combination)
में तुल्य धारिता

यदि C1, C2, C3 धारिता के तीन संधारित्र श्रेणीक्रम में जुड़े हो तो संयोजन की तुल्य धारिता
$$ \frac{1}{C} = \frac{1}{C_1}+\frac{1}{C_2}+\frac{1}{C_3}$$
यदि C1, C2…. Cn धारिता के n संधारित्र श्रेणीक्रम में जुड़े हो तो संयोजन की तुल्य धारिता
$$ \frac{1}{C} = \frac{1}{C_1}+\frac{1}{C_2}+…..+ \frac{1}{C_n}$$

संधारित्रों के समांतर क्रम संयोजन (Parallel combination) में तुल्य धारिता

यदि C1, C2, C3 धारिता के तीन संधारित्र समांतर क्रम में जुड़े हो तो संयोजन की तुल्य धारिता
C = C1 + C2 + C3

यदि C1, C2…. Cn धारिता के n संधारित्र समांतर क्रम में जुड़े हो तो संयोजन की तुल्य धारिता
C = C1 + C2 + …… + Cn

विस्थापन धारा

जब हम किसी संधारित्र को बैटरी से जोड़ते है तो उसमें विद्युत धारा प्रवाहित होती है। संधारित्र के बाहर धारा, चालन धारा के रूप में प्रवाहित होती है जबकि संधारित्र के अंदर चालन धारा का मान शून्य होता है। संधारित्र के अंदर धारा परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र के कारण प्रवाहित होती है जिसे हम विस्थापन धारा कहते है।

विस्थापन धारा निम्नलिखित प्रकार से दी जा सकती है,

$$I_d = \varepsilon_0 \frac{\partial E}{\partial t}$$