भौतिक विज्ञान (Physics)


भौतिक विज्ञान
 का अर्थ है – प्रकृति का अध्ययन। प्रकृति में सम्पूर्ण ब्रह्मांड (universe) को सम्मिलित किया जा सकता है। प्रकृति के मूलभूत नियमों (fundamental laws) एवं परिघटनाओं का अध्ययन प्राकृतिक विज्ञान की जिस शाखा के अंर्तगत किया जाता है, उसे भौतिक विज्ञान (physics) कहा जाता है। अत: प्रकृति का अध्ययन (study of nature) ही भौतिक विज्ञान (bhautik vigyan) है।

भौतिक विज्ञान (in hindi) का अंग्रेजी भाषा में समानार्थी शब्द “physics” है। “Physics” शब्द लैटिन भाषा के शब्द “Fusis” से लिया गया है। लैटिन भाषा में “Fusis” शब्द का अर्थ “प्रकृति” (nature) होता है। भौतिक विज्ञान का तुल्य संस्कृत शब्द “भौतिकी” है। भौतिक विज्ञान को भौतिक शास्त्र भी कहा जाता है। भौतिक विज्ञान एक प्राकृतिक विज्ञान है जो प्रयोगों, मापों और गणितीय विश्लेषण पर आधारित है। इसमें प्राकृतिक नियमों को गणितीय समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है। इसमें ऊर्जा के विभिन्न स्वरूपों तथा द्रव्य से उसकी अन्योन्यक्रिया का अध्ययन किया जाता है।

हमारे चारों ओर होने वाली प्राकृतिक परिघटनाओं (natural phenomenon) जैसे किसी पत्थर को उर्ध्वाधर ऊपर फेंकने पर वापस नीचे आना, पेड़ से पत्तियों का गिरना, किसी पिंड को धक्का लगाने पर गतिशील हो जाना, पृथ्वी के चारों ओर चन्द्रमा की गति आदि का अध्ययन हम भौतिक विज्ञान में करते है।

भौतिक विज्ञान में किसी परिघटना के अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर विशिष्ट नियम या सिद्धांत बनाये जाते है। उदाहरण के लिये जब किसी पिंड को पृथ्वी तल से ऊपर फेंका जाता है तो वह वापस नीचे आता है इसी आधार पर न्यूटन ने निष्कर्ष निकाला कि इस ब्रह्मांड में प्रत्येक पिंड दूसरे पिंड को आकर्षित करता है जो गुरुत्वाकर्षण का नियम (newton law of gravitation) कहलाता है। प्राकृतिक परिघटनाएं विशाल पिंडो जैसे पृथ्वी, चन्द्रमा आदि से लेकर सूक्ष्म कणों जैसे परमाणु, अणु में भी हो सकती है।

भौतिक विज्ञान का जनक कोई व्यक्ति विशेष नहीं हैं। भौतिक विज्ञान एक प्राकृतिक विज्ञान है, जिसका विकास प्रकृति के क्रमबद्ध प्रेक्षणों एवं उनके निष्कर्षों के फलस्वरूप हुआ है|

भौतिक विज्ञान (Physics in hindi) की शाखाएं

भौतिक विज्ञान की प्रमुख शाखाएं निम्न है-

  • प्रकाशिकी
  • यांत्रिकी
  • विद्युत-चुम्बकत्व
  • क्वांटम यांत्रिकी
  • उष्मागतिकी
  • इलैक्ट्रोनिक्स
  • परमाण्वीय भौतिकी
  • नाभिकीय भौतिकी
  • आणविक भौतिकी
  • ठोस अवस्था भौतिकी

भौतिकी को अध्ययन की दृष्टि से मुख्यतः दो भागों में विभक्त किया जा सकता है-

  1. चिरसम्मत भौतिकी (classical physics) एवं
  2. आधुनिक भौतिकी ( modern physics)

चिरसम्मत भौतिकी (Classical Physics)

सन् 1900 ईस्वी पूर्व भौतिक विज्ञान से संबंधित जो ज्ञान अर्जित किया गया, उसको चिरसम्मत भौतिकी के अंतर्गत रखा जाता है। चिरसम्मत भौतिकी के अंतर्गत मुख्य रूप से स्थूल परिघटनाओं पर विचार किया जाता है, इसमें यांत्रिकी, वैद्युत गतिकी, प्रकाशिकी तथा ऊष्मागतिकी जैसे विषय सम्मिलित होते हैं।

यांत्रिकी (Mechanics)

यांत्रिकी विषय न्यूटन के गति के नियमों तथा गुरुत्वाकर्षण के नियम पर आधारित है तथा इसका संबंध कणों, दृढ़ एवं विरूपणशील पिण्डों, तथा कणों के व्यापक निकायों की गति से होता है। जेट के रूप में निष्कासित गैसों द्वारा रॉकेट-नोदन, जल-तरंगों का संचरण, वायु में ध्वनि तरंगों का संचरण तथा किसी बोझ के अधीन झुकी छड़ की साम्यावस्था यांत्रिकी से संबंधित विषयवस्तु हैं।

इसमें प्रकाश वेग की तुलना में बहुत कम वेग से गतिशील द्रव्य कणों की गति से सम्बन्धित घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। इसमें द्रव्य तथा उसके गुणों तथा किसी पिण्ड गति का बल की उपस्थिति में अध्ययन किया जाता है।

यांत्रिकी को निम्नलिखित भागों में बांटा जा सकता है,

  • स्थैतिकी (Statics)- जिसमें स्थिर वस्तुओं के बारे में अध्ययन किया जाता है।
  • गतिकी (Dynamics)- जिसमें गतिशील वस्तुओं के बारे में अध्ययन किया जाता है।
  • तरल यांत्रिकी (Fluid Mechanics)- जिसमें द्रव एवं गैस के गतिक व्यवहार के बारे में अध्ययन किया जाता है।
  • वायु गतिकी (Aerodynamics)- जिसमें वायु में गतिमान वस्तुओं के बारे में अध्ययन किया जाता है।

वैद्युत गतिकी (Electrodynamics)

इसके अंतर्गत आवेशित तथा चुम्बकित वस्तुओं से संबद्ध वैद्युत तथा चुम्बकीय परिघटनाओं का अध्ययन किया जाता हैं। वैद्युत गतिकी के मूल नियमों को कूलॉम, ऑर्सटेड, ऐम्पियर तथा फैराडे ने प्रतिपादित किया तथा इन नियमों की संपुष्टि मैक्सवेल ने अपने समीकरणों के समुच्चय द्वारा की। किसी धारावाही चालक की चुम्बकीय क्षेत्र में गति, किसी विद्युत परिपथ की प्रत्यावर्ती वोल्टता (सिगनल) से अनुक्रिया, किसी ऐन्टेना की कार्यप्रणाली, आयन मण्डल में रेडियो तरंगों का संचरण आदि वैद्युत गतिकी की विषयवस्तु हैं।

प्रकाशिकी (Optics)

इसमें प्रकाश पर आधारित परिघटनाओं का अध्ययन किया जाता है। प्रकाशिकी को दो भागों, तरंग एकाशिकी (Wave optics) एवं किरण प्रकाशिकी (Ray optics), में विभक्त किया जाता है।

  • किरण प्रकाशिकी (Ray Optics): किरण प्रकाशिकी में प्रकाश के गुणों का अध्ययन किरण ‘संकल्पना’ के आधार पर किया जाता है। किरण प्रकाश के पथ को प्रदर्शित करती है। एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक प्रकाश ऊर्जा के प्रवाह की दिशा, प्रकाश किरण कहलाती है। किरण प्रकाशिकी में मुख्यतः दर्पणों, लेन्सों तथा प्रिज्मों द्वारा प्रतिबिम्बों रचना एवं मूलभूत नियमों को किरण संकल्पना के आधार पर समझा जाता है। प्रकाश जिस माध्यम में चलता है, उसे प्रकाशीय माध्यम कहते है। यह माध्यम बायु, पानी, कांच आदि हो सकता है । प्रकाश निर्वात में भी गमन कर सकता है। निर्वात में प्रकाश की चाल अधिकतम तथा अन्य माध्यमों में निर्वात की अपेक्षा कम होती है। निर्वात में प्रकाश में का वेग 2.998×108 ms-1 होता है। प्रकाश एक वैद्युत चुंवकीय तरंग है, जिसका तरंगदैर्ध्य 400mm से 750 होता है।
  • तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics): इसमें व्यतिकरण , विवर्तन का अध्ययन किया जाता है।

ऊष्मागतिकी (Thermodynamics)

ऊष्मागतिकी के अंतर्गत वस्तुओं की समग्र गति पर विचार नहीं किया जाता, अपितु यह स्थूल संतुलन के निकायों पर विचार करती है, तथा इसका संबंध बाह्य कार्य तथा ऊष्मा स्थानांतरण द्वारा निकाय की आंतरिक ऊर्जा, ताप, ऐन्ट्रॉपी आदि में अंतर से होता है। ऊष्मा इंजन तथा प्रशीतक की दक्षता, किसी भौतिक अथवा रासायनिक प्रक्रिया की दिशा आदि, ऊष्मागतिकी की विषयवस्तु हैं।

आधुनिक भौतिकी (Modern Physics)

सन् 1900 ईस्वी पश्चात भौतिक विज्ञान से संबंधित जो ज्ञान अर्जित किया गया, उसको आधुनिक भौतिकी के अंतर्गत रखा जाता है। आधुनिक भौतिकी के अंतर्गत मुख्य रूप से सूक्ष्म परिघटनाओं पर विचार किया जाता है, इसमें क्वांटम यांत्रिकी, नाभिकीय भौतिकी, परमाणु भौतिकी, आण्विक भौतिकी, ठोस अवस्था भौतिकी तथा प्लाज्मा भौतिकी जैसे विषय सम्मिलित होते हैं।

क्वांटम यांत्रिकी (Quantum mechanics)

इसके अंतर्गत पदार्थ के अति सूक्ष्म कणों (परमाणु, न्यूक्लियस तथा इलेक्ट्रान प्रोटॉन आदि सभी मौलिक कणों) के संबंध में अध्ययन किया जाता है।

परमाणु भौतिकी (Atomic physics)

इसके अन्तर्गत परमाणु संरचना व परमाणु के गुणों का अध्ययन किया जाता है।

आण्विक भौतिकी (Molecular physics)

इसके अन्तर्गत अणु संरचना व अणु के गुणों का अध्ययन किया जाता है।

ठोस अवस्था भौतिकी (Solid state physics)

इसमें क्रिस्टलीय अर्द्ध चालक एवं मिश्र धातुओं का अध्ययन किया जाता है।

प्लाज्मा भौतिकी (Plasma physics)

इसमें पदार्थ की चतुर्थ अवस्था, जिसे प्लाज्मा कहते हैं, से संबंधित अध्ययन किया जाता है|

नाभिकीय भौतिकी (Nuclear physics)

इसमें नाभिक की संरचना एवं उसके गुणों का अध्ययन किया जाता है।

भौतिकी की अन्य शाखाएं

भौतिक विज्ञान की अन्य शाखायें निम्न हैं:

  • पर्यावरण भौतिकी (Environmental Physics)
  • अन्तरिक्ष भौतिकी (Space Physics)
  • जैव भौतिकी (Bio Physics)
  • रासायनिक भौतिकी (Chemical Physics)
  • अभियांत्रिकी भौतिकी (Engineering Physics)
  • चिकित्सीय भौतिकी (Medical Physics)
  • समुद्र भौतिकी (Ocean Physics)
  • भू–भौतिकी (Geo Physics)
  • वातावरण भौतिकी (Atmospheric Physics)
  • तारा भौतिकी (Astro Physics)

भौतिक विज्ञान का महत्व

भौतिक विज्ञान अभियांत्रिकी तथा शिल्पविज्ञान की जन्मदात्री होने के नाते यह इस युग के अखिल सामाजिक एवं आर्थिक विकास की मूल प्रेरक है। वर्षो पहले भौतिकी को दर्शन शास्त्र का अंग मानकर नैचुरल फिलॉसोफी या प्राकृतिक दर्शनशास्त्र के रूप में अध्ययन किया जाता था। साल 1870 के बाद में इसे भौतिकी के रूप मे जाना जाने लगा।