चुंबक (Magnet) क्या है? इसके‌ ध्रुव, प्रकार, गुण, उपयोग एवं रख रखाव

चुंबक एक विशेष पदार्थ होता है जो लोहा, निकल जैसे पदार्थों को आकर्षित करता है। चुंबक अपने चारों ओर एक क्षेत्र उत्पन्न करता है, जिसे चुंबकीय क्षेत्र कहते हैं। चुंबकीय क्षेत्र अदृश्य होता है। चुंबक में दो ध्रुव होते, ये उतरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव कहलाते है।

चुम्बक के ध्रुव

विरामावस्था में लटके चुम्बक का जो सिरा उत्तर दिशा की ओर होता है उसे उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिण दिशा की ओर वाला सिरा दक्षिणी ध्रुव कहलाता है। स्वतंत्र लटका हुआ चुम्बक सदैव उत्तर व दक्षिण दिशा को इंगितकरता है।

चुंबक के प्रकार

चुंबक मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं- प्राकृतिक चुंबक एवं कृत्रिम चुंबक ।

प्राकृतिक चुंबक

प्रकृति में पाया जाने वाला चुंबक प्राकृतिक चुंबक कहलाता है। प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले लोहे के एक अयस्क मैग्नेटाइट को प्राकृतिक चुंबक कहते है। मैग्नेटाइट के टुकड़े को स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर यह उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है। इस गुण का उपयोग दिशा ज्ञात करने में किया
जाता है। अत: मैग्नेटाइट को दिक् सूचक पत्थर (Lode stone) भी कहा जाता है।

कृत्रिम चुंबक

मानव निर्मित चुंबक को कृत्रिम चुम्बक (Artificial Magnet) कहते हैं। प्राकृतिक चुंबक मे चुम्बकत्व अत्यधिक अल्प होता है अतः चुंबकत्व को बढ़ाने के लिए कृत्रिम चुम्बक बनाये जाते है। चुम्बकीय पदार्थ जैसे-लोहा, स्टील, निकिल आदि को यदि किसी तीव्र चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाये तो इन पदार्थों में चुम्बकीय गुण प्रेरित हो जाते हैं। इस प्रकार बनने वाले चुम्बक को कृत्रिम चुम्बक कहते हैं।

कृत्रिम चुंबक के उदाहरण

घुड़नाल चुम्बक (Horse Shoe Magnet) , छड़ चुंबक (Bar Magnet), बेलनाकार चुंबक, चुंबकीय सूई (Magnetic needle), कम्पास सूई (Compass needle) आदि कृत्रिम चुम्बक के उदाहरण है।

कृत्रिम चुंबक के प्रकार

कृत्रिम चुम्बक दो प्रकार की हो सकती है, स्थाई चुम्बक एवं अस्थाई चुंबक।

स्थायी चुंबक (Permanent Magnet)

जिस चुम्बक में चुम्बकत्व का गुण स्थायी होता है उसे स्थायी चुम्बक कहते हैं । यदि चुम्बक स्टील अथवा चुम्बकीय मिश्र
धातुओं जैसे-एलिनिको (Al+Ni+Co), कोबाल्ट स्टील अथवा टंगस्टन का बनाया जाये तो वह अनिश्चित काल तक चुम्बकीय गुण प्रदर्शित करता है। इनके चुम्बकत्व के गुण को सरलता से नष्ट नहीं किया जा सकता। अतः इस प्रकार के चुम्बक स्थाई चुम्बक कहलाते हैं। स्थाई चुम्बकों का मुख्य दोष यह है कि
इनके चुम्बकत्व को नियन्त्रित करना सम्भव नहीं है; अतः इनका उपयोग विद्युत मोटर, विद्युत जनित्र, विद्युत घण्टी आदि में नहीं किया जा सकता।

अस्थायी चुंबक (Temporary Magnet)

जिस चुम्बक में चुम्बकत्व का गुण स्थायी नहीं रहता है उस चुम्बक को अस्थायी चुम्बक कहते हैं । अस्थाई चुम्बक नरम लोहे अथवा नरम स्टील के बने होते हैं। ये तभी तक चुम्बकित रहते हैं जब तक कोई चुम्बकीय बल वहाँ उपस्थित रहता है।
चुम्बकत्व उत्पन्न करने वाली चुम्बकीय युक्ति की प्रबलता बदलकर अस्थाई चुम्बकों में चुम्बकत्व की मात्रा को नियन्त्रित कर सकते हैं। इन्हीं गुणों के कारण विद्युत जनित्र, विद्युत घण्टी, विद्युत मोटर आदि में अस्थाई चुम्बक का उपयोग किया जाता है।

चुम्बक के गुण

  • यह चुंबकीय पदार्थों जैसे लोहा, निकल आदि से बनी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।
  • चुंबक को स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर यह सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है।
  • चुंबक के समान ध्रुवों में प्रतिकर्षण तथा असमान ध्रुवों में आकर्षण होता है।

चुंबक के उपयोग

चुंबक के निम्नलिखित उपयोग हैं-

  • दिशा सूचक यंत्र में
  • स्पीकर में
  • विद्युत क्रेन द्वारा लोहे की भारी वस्तुओं को उठाने में
  • आंख में से लोहे के कण को निकालने में

चुंबक का रख रखाव

चुंबक को गिराने से, चोट मारने से तथा गर्म करने से इसका चुंबकत्व का गुण नष्ट होने लगता है अत: इसका उचित रख रखाव आवश्यक है।